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बिराजे हे शीतला दाई - कांतिकार्तिक यादव | Biraje He Shitla Dai Lyrics - Kantikartik Yadav Jas Geet Lyrics


बिराजे हे शीतला दाई 
Biraje He Shitla Dai Lyrics
Kantikartik Yadav Jas Geet Lyrics 

  • गीत - बिराजे हे शीतला दाई
  • स्वर - कांतिकार्तिक यादव
  • गीतकार - हर्ष कुमार बिन्दु
  • संगीत - ओपी देवांगन
  • प्रकार - छत्तीसगढ़ी जस गीत
  • लेबल - कोक क्रिएशन



स्थायी

बस्ती बस्ती गांव गांव बिराजे हे शीतला दाई

बस्ती बस्ती गांव गांव बिराजे हे शीतला दाई

घर ले निकल के सबले पहली

घर ले निकल के सबले पहली

तोला माथ नवाई


अंतरा 1

अपन अपन बोली भाखा मा शीतला तोला सुमिरत हे

जईसे जिहां के रीति रिवाज हे वईसे तोला पूजत हे

हो शुभ कारज घर गांव म होथे दाई तोला पुछत हे

जम्मो कुटुम्ब सकलाके दाई नेवता तोला देवत हे

तोर किरपा अउ आशीष ले माता

तोर किरपा अउ आशीष ले माता

कारज सुफल हो जाई


अंतरा 2

अलग अलग तोर रूप हे माता अलग अलग तोर भाव हे

जिहां बिराजे तैं हा माता हरियर निमवा के छांव हे

हो सबला शीतल करथस तैं हा शीतला तोरे नाव हे

डंडा शरण परथे तर जाथे अईसे शुभ तोर पांव हे

बिन सुवारथ तन मन हे जेखर

बिन सुवारथ तन मन हे जेखर

भाग ओखर खुल जाई


अंतरा 3

अईसे किस्सा सुने रेहेव मैं पृथ्वी लोक म तैं आए

अन जाने म गरम पदारथ तोर उपर वो गिर जाए

हो तन तोर आगी असन अगियाए किंजरे गांव भर अकुलाए

एक कुम्हारिन सेवा करे तोर दही बासी जुड़ खवाए

कांतिकार्तिक हा जस तोर गावै

कांतिकार्तिक हा जस तोर गावै

बिन्दु करै सेउकाई


घर ले निकल के सबले  पहली

घर ले निकल के सबले  पहली

तोला माथ नवाई


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