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नव दिन बर पहुना बन के आये - पूरन साहू Nav Din Bar Pahuna Ban Ke Aaye Lyrics | Old Jas Geet Lyrics

नव दिन बर पहुना बन के आये 
Nav Din Bar Pahuna Ban Ke Aaye Lyrics 
Old Jas Geet Lyrics 


  • गीत - नव दिन बर पहुना बन के आये
  • स्वर - पूरन साहू
  • गीतकार - पूरन साहू 
  • संगीतकार - पूरन साहू
  • निर्माता - मोहन साहू
  • म्यूजिक लेबल - एबीआर फिल्मस




स्थायी

नव दिन बर पहुना बन के आये

दुर्गा महतारी वो जग पालनहारी वो

नव दिन बर पहुना बन के आये

दुर्गा महतारी वो जग पालनहारी वो

हो अंगना तोर मेला हे भराये हो

अंगना तोर मेला हे भराये

दुर्गा महतारी वो जग पालनहारी वो


अंतरा 1

यहो सुरपुर के ठकुराईन दाई 

भुईया के भाग जगाये

यहो अन्नपुर्णा के अंगना में मईया 

पहुना बन के आये

यहो अंग भर सोहे अनवट गहना

तीनो लोक मोहाए

यहो मोहनी मुरतिया बईठे आसन

बघवा सवारी सजाए

हो मया तोर गजबे महामाये

मया तोर गजबे महामाये

जुग जुग अवतारी वो

जग पालनहारी वो


अंतरा 2

यहो नव दिन ले नवरतिया दयाली

मउरे मया के फुलवारी

यहो शैलपुत्री अउ ब्रम्हचारणी

आबे मोर दुवारी

यहो चन्द्रघण्टा कुष्मांडा स्कंद

आइन पारी पारी

यहो कात्यायनी अउ कालरात्री

महागौरी सिद्धीदात्री

हो नव दिन रतिहा जगमगाए हो

नव दिन रतिहा जगमगाए हो

घर घर पगधारी वो

जग पालनहारी वो


अंतरा 3

डीही डोंगर बन पर्वत दाई

सरग बरोबर लागे

यहो चारो मुड़ा मोर जोत जंवारा

लहर लहर लहरागे

यहो नव दिन अईसे लागे जईसे

देवारी तिहार आगे

यहो लाखो नर नारी लईका मन

तोर अंगना सकलागे

हो पान फूल नरियर चघाये हो

पान फूल नरियर चघाये हो

उमड़े भीड़ भारी वो

जग पालन हारी वो


अंतरा 4

यहो तोर दर्शन ला पा के जम्मो 

दुख पीरा बिसराईन

यहो तोर महिमा के सगरी गहरी 

कउनो थाह नई पाईन

यहो मै मुरहा कतका ला बताहूं

जोगी जती थर्राईन

यहो तोर लईका मन नव दिन सेवा

उमर झूमर के बजाईन

हो प्रेमे पूरन हा मन बसाए हो

प्रेमे पूरन हा मन बसाए हो

जावै बलिहारी वो

जग पालनहारी वो

हो अंगना तोर मेला हे भराये हो

अंगना तोर मेला हे भराये हो

दुर्गा महतारी वो जग पालनहारी वो

नव दिन बर पहुना बन के आये

दुर्गा महतारी वो

जग पालनहारी वो


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